दिल से इबादत बिकती है
कविता
ना खुशी कहीं ना गम कहीं बिकता है ,
लोग बड़ी गलतफहमी में हैं ।
कि शायद कहीं मरहम बिकता है ,
इंसान तो ख्वाइशों से बंधा हुआ एक जिद्दी परिंदा है
उम्मीदों से ही घायल है और उन उम्मीदों पर ही जिन्दा है ।
न समझ है वो इन्सान जो उन उम्मीदों पर जिन्दा है ।
उम्मीद रख उस रब पर जो मर कर भी आज तेरे लिए जिन्दा है ।
कविता
जीवन का महत्त्व जीवन का उजाला है
माँ धूप पड़े तो छाव है माँ परिवार से बड़ा धन नहीं
पिता से बड़ा सलाहकार नहीं
माँ से ज्यादा प्यार किसी के पास नहीं
भाई से अच्छा कोई भागीदार नहीं
बहन से बड़ा कोई शुभचिंतक नहीं
और इस जीवन में ईश्वर के सिवा कोई रक्षक नहीं
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